ये भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का मूल आधार हैं। उन्होंने बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद सबसे पहले सारनाथ में इन चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया था। हिंदी में ये इस प्रकार हैं:
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दुःख सत्य (Dukkha Satya)
जीवन में दुःख है। जन्म, बुढ़ापा, रोग, मृत्यु, वियोग, अप्रीतिकर से मिलना और प्रीतिकर से बिछड़ना — ये सभी दुःख हैं। -
दुःख समुदय सत्य (Dukkha Samudaya Satya)
इस दुःख का कारण है — तृष्णा (इच्छा, लालच, आसक्ति)। यही इच्छा बार-बार जन्म और दुःख का कारण बनती है। -
दुःख निरोध सत्य (Dukkha Nirodha Satya)
इस तृष्णा का अंत किया जा सकता है। जब तृष्णा समाप्त होती है, तो दुःख का अंत हो जाता है — यही निर्वाण है। -
दुःख निरोध मार्ग सत्य (Dukkha Nirodha Marga Satya)
दुःख से मुक्ति पाने का एक मार्ग है — आष्टांगिक मार्ग (Ashtangik Marg)। यह आठ अंगों वाला मार्ग है जो नैतिकता, ध्यान और प्रज्ञा पर आधारित है।
